मैडीकल कालेज खोलने के बारे में जानने योग्य तथ्य
1. मूल सँरचना स्थापित करने केलिए कम से कम 500 करोड़ रुपये का पूँजीनिवेश अनिवार्य;
2. करीब 2000 कर्मचारियों के वेतन इत्यादि पर प्रति वर्ष कम से कम 100 करोड़ रुपये व्यय;
3. सरकारी क्षेत्र में ही मैडीकल कालेज खोलने का अर्थ है स्वास्थ्य-क्षेत्र के बजट का ज्यादातर भाग इसमें खर्च हो जाना और परिणाम स्वरूप आम जनता की सुविधा-हेतू स्वास्थ्य-केन्द्रों की स्थापना, स्टाफ व रख-रखाव (जो कि हमारे पहाड़ी राज्य में बहुत महत्वता रखता है) करने के लिए बजट में कमी पड़ जाना;
4. निजी-क्षेत्र में उपलब्ध पूँजी व प्रबन्धन सँसाधनों का सार्वजनिक क्षेत्र की साँझेदारी के साथ जोड़कर जो गति विकास की देश के कुछ दूसरे प्रदेशों में हुई है वह इस बात का प्रमाण देती है कि ऐसी साँझेदारी आम जनता के हित में होती है;
5. टाँडा मैडीकल कालेज जल्दबाजी में खोलकर न केवल उस कालेज का सँचालन ही प्रभावित हुआ बल्कि शिमला मैडीकल कालेज को अपँग बना दिया गया, और यह मुख्यता वितिय अभाव के कारण हुआ जो कि सार्वजनिक क्षेत्र अकेले वहन करने में असमर्थ था;
6. मैडीकल कालेज (सरकारी हो या गैर-सरकारी) के साथ हौसपिटल जुड़ जाने से मरीजों पर केवल थोड़ा सा वितीय बोझ पड़ता है जबकि उनको स्वास्थ्य सुविधा उच्च स्तर की उपलब्ध होती है;
7. मैडीकल कालेज से जुड़े हौसपिटलों में विशेष बिमारियों का इलाज करवाने के लिए ही मरीज जाते हैं न कि आम व छोटी-मोटी बिमारियों का इलाज करने के लिए, और ऐसे इलाज में खर्च सरकारी व गैर-सरकारी सँस्थानों में लगभग बराबर होता है;
8. निजी-क्षेत्र द्वारा चलाए जा रहे ज्यादातर सँस्थान सरकारी सँस्थानों से पीछे नहीं हैं, और न ही उन सँस्थानों से शिक्षा प्राप्त डाक्टर योग्यता में किसी से कम हैं;
This is an initiative to spread awarenees among common man about Public Policy and Reforms
Saturday, May 2, 2009
हिमाचल प्रदेश राज्य की स्थापना से लेकर काँग्रेस कुशासन के कारण उत्पन्न समस्यायें
1. बेरोज़गारी का लगातार बढ़ना;
2. गरीबी का उन्मुलन न हो पाना;
3. शिक्षा सँस्थानों का विकास व्यवसाइक न हो करके केवल अध्यातमिक-केन्द्रित होने से शिक्षित बेरोजगारों की अत्याधिक बढ़ोतरी होना;
4. वनों व पर्यावरण का प्रभावशाली ढँग से सँरक्षण करने में असमर्थता;
5. प्रशासनिक प्रभावहीनता के बढ़ने से आम आदमी की कठिनाइयों का बढ़ना;
6. सार्वजनिक इकाइयों में एक के बाद एक का घाटे में डूब जाना;
7. सामाजिक व आर्थिक सुधार लाने में पूर्ण असमर्थता;
8. सड़क, रेल व हवाई सँरचना विकास करने में ढीलमढला रवैया;
9. मिझौलियों द्वारा हो रहे किसानों के शोषण को न रोक पाना;
10. स्वास्थ्य सुविधायें उपयुक्त ढँग से आम लोगों को प्रदान करने में असमर्थता;
11. शिक्षा सँस्थानों में उपयुक्त सँरचना व शिक्षक दे पाने में असमर्थता;
12. क्षेत्रवाद की भावना को बढ़ावा देना;
13. जातिवाद को बढ़ावा देना;
14. भतीजा वाद को बढ़ावा देना।
Friday, May 1, 2009
राज्य (हिमाचल प्रदेश) में काँग्रेस सरकार द्वारा 2003-08 की अवधी में किए गए दुष-प्रभाव वाले कार्य
1. क्षेत्रीय भेद भाव को राजनैतिक व प्रशासनिक स्तर पर बढ़ावा दिया और इस बात की झलक सामाजिक व आर्थिक विकास में भी नज़र आई;
2. भ्रष्टाचार चरम सीमा तक पँहुच गया;
3. सड़क निर्माण व मुरम्मत कार्य बिल्कुल ठप पड़ गया;
4. केन्द्र में अपनी ही पार्टी की अगुवाई वाली सरकार होते हुए भी राज्य की काँग्रेस सरकार न तो सँरचना विकास हेतू कोई विशेष आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकी और न ही किसी केन्द्रीय शिक्षा या स्वास्थ्य सँस्था की स्थापना करवा सकी;
5. पालमपुर में विवेकानन्द ट्रस्ट द्वारा सँचालित सँस्थान को प्रभावी ढँग से चलाने में निम्न स्तर की राजनीती खुलेआम खेलकर प्रदेश की जनता को होने वाले महत्वशाली लाभ से वँछित रखा गया;
6. रोहताँग टनल का कार्य बिल्कुल ठप पड़ गया;
7. रेल नैटवर्क का राज्य में कोई विस्तार नहीं करवा सके;
8. हवाई सेवा में विस्तार होने के बजाय उल्टा उन्मुलन हो गया;
9. मैडीकल कालेजों में डाक्टरों व अन्य टैक्नीकल पदों की अत्याधिक रिक्तियां होने के कारण जनता को इन सँस्थानों से पुर्ण लाभ नहीं मिल सका;
10. शिक्षा सँस्थानो में रिक्तियां होने के कारण और उपर से चन्द रिक्तियों को अपंग व्यवस्थानुसार भरकर बच्चों की पढ़ाई पर बुरा प्रभाव पड़ा;
11. आम जनता की भलाई वाली स्कीमों को क्रियान्वयन करने वाले विभागों में रिक्त पदों को न भर करके एक ओर जनहित को क्षति पँहुची तथा दूसरी ओर मिलने वाले रोज़गार से प्रदेश के युवाओं को वँछित रहना पड़ा;
12. पन-बिजली योजनाओं सम्बन्धी एम.ओ.यु. में राज्य हितों को नज़र-अन्दाज किया गया;
13. राज्य में चल रहे निजी-उद्योगों में 70% हिमाचलियों को नौकरी पर रखने वाली शर्त का कड़ाई से पालन न करके राज्य के बेरोजगार युवकों को नौकरी से वंछित रहना पड़ा;
14. एच.पी.एम.सी., एग्रो-इन्डस्ट्री तथा एग्रो-पैकेजिंग जैसी किसान-हितैशी सार्वजनिक इकाइयों की दुर्दशा इतनी बढ़ा दी कि ये बन्द होने के कगार पर पँहुच गई;
15. हौरटीकलचर-मिशन के अन्तर्गत केवल प्रचार किया गया और कोई ठोस योजना फिल्ड में लागु न करके लोगों को इससे होने वाले महत्वशाली लाभ से वँछित रखा गया;
16. किसानों व बागवानों को आढ़तियों द्वारा किए जा रहे शोषण से बचाने केलिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाये गए;
17. सिंचाई परियोजनाओं का सुधार करने की बजाय घोटाले करने की ओर ही ज्यादा ध्यान दिया गया।
यु.पी.ए. सरकार के कार्यकाल की मुख्य त्रुटियां
1. गैर-संवैधानिक सत्ता-केन्द्र स्थापित कर, प्रधान मन्त्री सँस्था का भरपूर उन्मुलन करना;
2. देश की आन्तरिक व बाह्या सुरक्षा करने में पूर्ण असमर्थता;
3. आतँक-विरोधी कानून रद कर आतँक को प्रोत्साहन देना और आतँकी हमले में काफी मासूमों की जानें गंवाकर एक अपंग कानून बनाना;
4. महँगाई नियन्त्रण में पूर्ण असमर्थता;
5. किसानों की समस्याओं का उन्मुलन करने में पूर्ण असमर्थता;
6. सच्चर-कमेटी की रिपोर्ट बनवा कर साम्प्रदाइकता को बढ़ाना;
7. रामसेतू मुद्ये पर धार्मिक भावना से खिलवाड़ करना;
8. अमरनाथ श्राईन बोर्ड को यात्रा हेतू भूमी देने बारे राजनैतिक-साँप्रदाइकता का खेल खेलना;
9. एन.डी.ए. सरकार द्वारा गति से किए जा रहे सँरचना विकास को ब्रेक लगाना;
10. पड़ोसी देशों से सहयोग मिलने के बजाय आतँकवाद की सौगात पाना;
11. श्रीलँका में तामिलों के हितों की रक्षा करने में असमर्थता;
12. आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया को बिल्कुल ठप कर देना;
13. महिलाओं के लिए 33% आरक्षण-बिल पारित करवाने में असफलता;
2. देश की आन्तरिक व बाह्या सुरक्षा करने में पूर्ण असमर्थता;
3. आतँक-विरोधी कानून रद कर आतँक को प्रोत्साहन देना और आतँकी हमले में काफी मासूमों की जानें गंवाकर एक अपंग कानून बनाना;
4. महँगाई नियन्त्रण में पूर्ण असमर्थता;
5. किसानों की समस्याओं का उन्मुलन करने में पूर्ण असमर्थता;
6. सच्चर-कमेटी की रिपोर्ट बनवा कर साम्प्रदाइकता को बढ़ाना;
7. रामसेतू मुद्ये पर धार्मिक भावना से खिलवाड़ करना;
8. अमरनाथ श्राईन बोर्ड को यात्रा हेतू भूमी देने बारे राजनैतिक-साँप्रदाइकता का खेल खेलना;
9. एन.डी.ए. सरकार द्वारा गति से किए जा रहे सँरचना विकास को ब्रेक लगाना;
10. पड़ोसी देशों से सहयोग मिलने के बजाय आतँकवाद की सौगात पाना;
11. श्रीलँका में तामिलों के हितों की रक्षा करने में असमर्थता;
12. आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया को बिल्कुल ठप कर देना;
13. महिलाओं के लिए 33% आरक्षण-बिल पारित करवाने में असफलता;
Wednesday, April 29, 2009
देश के समक्ष मुख्य चुनौतियाँ
1. सुरक्षा - आन्तरिक व बाहिया
2. सु-राज- प्रभावशाली प्रशासन, गतिशील विकास व मज़बूत अर्थदशा
3. समानता- धर्म व जाति इत्यादि आधारित भेदभाव मिटाना
4. सामाजिक व साँस्कृतिक सुदृढ़ता
5. लोकतान्त्रिक सुदृढ़ता
6. राष्ट्रवाद, राष्ट्रीयता, राष्ट्रीय एकता व अखण्डता की सुदृढ़ता
7. आम आदमी केन्द्रित- मँहगाई नियन्त्रण व बेरोज़गारी उन्मुलन
8. गान्धीवादी समाजवाद- शोषण-रहित समाज की स्थापना
Monday, February 16, 2009
सु-राज सम्बन्धि सुझाव
1. कार्य व्यवस्था एवं प्रणाली में व्यापक सुधार
2. सरल व्यवस्था
3. नियमों की समीक्षा कर उन्हें परिस्थिति सोपेक्ष, सरल तथा आसान बनाना
4. पारदर्षिता व्यवस्थापित करना
5. उत्तरदाइत्वता को कड़ाई से लागू करना
6. प्रभावशाली पुनर्वलोकन एवं मुल्यांकण व्यवस्था स्थापित करना
7. साप्ताहिक व मासिक सामाइकी रिपोर्टों की सरल व सुक्षम व्यवस्था स्थापित करना
8. आवश्यक्तानुसार कार्य शुध्दि एवं संशोधन करने हेतु प्रभावशाली प्रक्रम बनाना
9. कार्यकुशलता व निष्कृयता में अन्तर कर पारितोषण व दण्ड नीति का कड़ाई से अनुपालन करना
10. प्रभावशाली लोक शिकायत निवारण प्रकरण लागू करना
11. पुलिस कार्य प्रणाली में व्यापक सुधारकर आम जनता का विश्वास जीतना
12. सामाजिक व आर्थिक क्षेत्र से सम्बन्धित भरोसेमन्द आंकड़ा-आधार तैयार कर आवश्यक्ता-आधारित परियोजनाओं का क्रियान्वयन करना
2. सरल व्यवस्था
3. नियमों की समीक्षा कर उन्हें परिस्थिति सोपेक्ष, सरल तथा आसान बनाना
4. पारदर्षिता व्यवस्थापित करना
5. उत्तरदाइत्वता को कड़ाई से लागू करना
6. प्रभावशाली पुनर्वलोकन एवं मुल्यांकण व्यवस्था स्थापित करना
7. साप्ताहिक व मासिक सामाइकी रिपोर्टों की सरल व सुक्षम व्यवस्था स्थापित करना
8. आवश्यक्तानुसार कार्य शुध्दि एवं संशोधन करने हेतु प्रभावशाली प्रक्रम बनाना
9. कार्यकुशलता व निष्कृयता में अन्तर कर पारितोषण व दण्ड नीति का कड़ाई से अनुपालन करना
10. प्रभावशाली लोक शिकायत निवारण प्रकरण लागू करना
11. पुलिस कार्य प्रणाली में व्यापक सुधारकर आम जनता का विश्वास जीतना
12. सामाजिक व आर्थिक क्षेत्र से सम्बन्धित भरोसेमन्द आंकड़ा-आधार तैयार कर आवश्यक्ता-आधारित परियोजनाओं का क्रियान्वयन करना
सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक सुधार के मुख्य मद
1. छुआछूत उन्मुलन
2. अणु-कुपोषण उन्मुलन
3. बाल-विवाह प्रथा का उन्मुलन
4. नियोजित-परिवार प्रथा को प्रोत्साहन देना
5. पारिवारिक संस्था व मुल्यों को सुदृढ़ करना
6. स्थानीय सांस्कृति व पौराणिक धरोहर की रक्षा एवं सुदृढ़ता
7. स्थानीय कला, हस्तकला, लाभदायक रिती-रिवाजों और गायकी इत्यादि को प्रोत्साहन देना
8. व्यक्तिगत तथा स्थानिक स्वच्छता के बारे जागरूकता लाकर अणुरहित वातावरण बनाने केलिए प्रोत्साहित करना
9. खाद्य प्रसंसकरण उद्योगों सम्बन्धि संरचना को सुदृढ़ करना
10. टिकाउ ढंग से खनिज-दोहन करना
11. पूर्ण पन-बीजली क्षमता का शीघ्र अति शीघ्र दोहन करना
12. जड़ी-बुटी उद्योग सम्बन्धि संरचना सुदृढ़ करना
13. इको-टुरिज्म को विशेष प्रोत्साहन देकर रोजगार के अवसर पैदा करना
14. उपयुक्त कृषि प्रक्रिया प्रोत्साहित कर भू-उत्पादक्ता बढ़ाना
15. सार्वजनिक इकाइयों की कार्य प्रणाली में व्यापक सुधार कर राज्य के लिए आय का साधन बनाना
16. सड़क-रेल-हवाई सम्बन्धि संरचना को सुदृढ़ करना
17. शौर व वायु जैसी पुनर्विकास-योग्य उर्जा स्त्रोतों सम्बन्धि संरचना का विकास करना
18. कृषि व बागवानी उत्पादों की दोहन प्रणाली एवं संरचना में सुधार कर क्षय को न्युनतम-स्तर तक लाना
2. अणु-कुपोषण उन्मुलन
3. बाल-विवाह प्रथा का उन्मुलन
4. नियोजित-परिवार प्रथा को प्रोत्साहन देना
5. पारिवारिक संस्था व मुल्यों को सुदृढ़ करना
6. स्थानीय सांस्कृति व पौराणिक धरोहर की रक्षा एवं सुदृढ़ता
7. स्थानीय कला, हस्तकला, लाभदायक रिती-रिवाजों और गायकी इत्यादि को प्रोत्साहन देना
8. व्यक्तिगत तथा स्थानिक स्वच्छता के बारे जागरूकता लाकर अणुरहित वातावरण बनाने केलिए प्रोत्साहित करना
9. खाद्य प्रसंसकरण उद्योगों सम्बन्धि संरचना को सुदृढ़ करना
10. टिकाउ ढंग से खनिज-दोहन करना
11. पूर्ण पन-बीजली क्षमता का शीघ्र अति शीघ्र दोहन करना
12. जड़ी-बुटी उद्योग सम्बन्धि संरचना सुदृढ़ करना
13. इको-टुरिज्म को विशेष प्रोत्साहन देकर रोजगार के अवसर पैदा करना
14. उपयुक्त कृषि प्रक्रिया प्रोत्साहित कर भू-उत्पादक्ता बढ़ाना
15. सार्वजनिक इकाइयों की कार्य प्रणाली में व्यापक सुधार कर राज्य के लिए आय का साधन बनाना
16. सड़क-रेल-हवाई सम्बन्धि संरचना को सुदृढ़ करना
17. शौर व वायु जैसी पुनर्विकास-योग्य उर्जा स्त्रोतों सम्बन्धि संरचना का विकास करना
18. कृषि व बागवानी उत्पादों की दोहन प्रणाली एवं संरचना में सुधार कर क्षय को न्युनतम-स्तर तक लाना
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